Thursday, January 21, 2010

बिहारी होने का अफ़सोस करूँ या हिन्दुस्तानी होने का ग़म

कल समाचारों में ब्रेकिंग न्यूज़ आ रहा था, महाराष्ट्र में टैक्सी परमिट के सम्बन्ध में। टैक्सी परमिट के लिए मराठी बोलने, समझने, और पढ़ने की अनिवार्यता के साथ १५ साल से महाराष्ट्र का निवासी होना भी आवश्यक कर दिया गया था। दूसरा ही समाचार ऑस्ट्रेलिया से आ रहा था। भारतीयों पर एक और हमला हुआ था वहाँ। लोग इस पोस्ट का title पढ़कर समझ ही गए होंगे कि इन दोनों समाचारों का ज़िक्र यहाँ पर क्यूँ किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हो रहे जुर्म की गाथा अब कई महीने पुरानी हो चली है। एक पर एक समाचार आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय बार-बार दिलासा दिलाने में लगा हुआ है। न्यूज़ चैनल भी भिड़े हुए हैं ऑस्ट्रेलिया की छवि को यहाँ के 'होने-वाले-प्रवासियों' के मनों में धूमिल करने में। कोई एक भी कसर नहीं छोड़ रहा। सब अपनी औकात से इस खबर को सनसनीखेज बनाने में लगे हुए हैं। प्रथम-दृष्ट्या मुझे भी आश्चर्य हुआ एवं ख़राब लगा कि ये हम हिन्दुस्तानियों के साथ क्या हो रहा है विदेशो में। अचानक से ये अंतर क्यूँ आ गया। कुछ साल पहले ऐसी ही घटनाएँ अमेरिका और यूरोप में भी घट रही थी। वो मामले अब शांत हो चुके हैं और आशा है कि ऑस्ट्रेलिया वाला मामला भी शांत हो ही जायेगा। मगर सोचने वाली बात ये जरूर है कि क्या सच में ऐसी घटनाएँ भारतीय विशेष पर हो रही हैं या ये उस देश की एक साधारण लचर कानून व्यवस्था है जो इस रूप में सामने आ रही है। हो सकता है वहाँ हिंदुस्तानियों के अलावा और भी देश के लोगो के साथ ऐसा हो रहा हो या फिर खुद वहाँ के लोगो के साथ भी ऐसा हो रहा हो। वो खबरे शायद हमतक पहुचती भी नहीं हैं इस लिए हम इसे भारत विरोधी मान कर हाय तौबा मचा रहे हैं। अब अपने देश को ही ले लीजिये। दिल्ली में आये दिन किसी विदेशी लड़की का बलात्कार हो जाता है। कुछ हफ्ते पहले ही गोवा में एक रूसी लड़की के बलात्कार की खबर आई थी। उसे लेकर रूस में भी ऐसा ही बवाल मचा होगा जैसा भारत में ऑस्ट्रेलिया की खबरों को लेकर मच रहा है। मगर क्या इसका मतलब ये है कि हम रूस-विरोधी हो गए हैं। कतई नहीं।
खैर आज इस पोस्ट को लिखने का मेरा मकसद विदेशो में हो रहे भारतीयों पर अत्याचार के बारे में ही लिखना नहीं है। आज यहाँ पर मैं भारत और बिहार के बीच एक समानता की रेखा खीचना चाह रहा हूँ। जो कुछ भारतीयों के साथ विदेशो में हो रहा है वो सब कुछ क्या हम बिहारी अपने देश में ही नहीं झेलते। शिव सेना और अब उनके साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने महाराष्ट्र में मराठी मानुष के हकों के नाम पर बिहारियों या यूँ कहे हिंदी-भाषियों पर जो कहर ढाए हैं उनकी प्रति मिलना नामुमकिन ही लगती है। मगर ज़रा नजर दौडाएंगे तो पाएंगे कि सिर्फ महाराष्ट्र में ही ऐसा नहीं हो रहा। हम बिहारी मजदूरों के रूप में पंजाब में पिट रहे हैं तो छात्रों के रूप में असम में। चैन से हमें कोई नहीं जीने दे रहा. उत्तर भारत हो या दक्षिण, गुजरती हमपर वही सब है जो महारष्ट्र में।
कही न कही भारत और बिहार में समानता तो जरूर है. आज विश्व मंदी के इस दौड़ में भारत की और मुंह बाए खड़ा है, उम्मीद लगाये हुए। देश में बिहार की इज्ज़त भी बढ़ रही है। अब हम बिहारियों को भी इज्ज़त की नजरो से देखा जा रहा है। हम बिहारियों के लिए लोगो की आवाज़ में अचानक एक बदलाव आ चुका है जो दिख रहा है। कुछ ऐसा ही भारत के साथ विश्व मंच पर भी हो रहा है। भारतीयों के लिए दुनिया भर के लोगो के मनों में इज्ज़त बढ़ रही है। देश के अन्दर बिहार तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है तो बाहर वैश्विक स्तर पर भारत की प्रगति का कोई जोड़ नहीं। इन सब के साथ भारत और बिहार में एक और समानता भी है। बिहारी देश के अन्दर दूसरे प्रांतो में पिट रहे हैं तो भारतियों को विदेशो में हिंसा का सामना करना पर रहा है। सोचता हूँ अगर कोई मराठी है तो उसे तो बस इस बात का ही दुःख उठाना है की भारतीय विदेशों में असुरक्षित हैं। हम बिहारियों को तो यहाँ double झटके मिलते हैं। समझ में नहीं आता की भारतीय होकर विदेशो में पिटने का गम मनाउँ या बिहारी होकर अपने ही देश में अपमानित होने का दंश झेलू।
लानत है हर उस आदमी पर जिसने ऑस्ट्रेलिया में हो रहे हमलों की निंदा की है और कभी बिहारियों पर हो रहे जुर्म की तरफ देखा तक नहीं है। अरे दूसरो के द्वारा किया गया अन्याय अपने देशवासियों के द्वारा दिए गए ग़मों के आगे कहाँ ठहरता है। मन तो बस इतना ही सोचता है कि बिहारी होने का अफ़सोस करूँ या हिन्दुस्तानी होने का गम!

3 comments:

RAJNISH said...

few days later i also said that BIHAR and INDIA is same because the situation which bihar face inside the country the same india is facing in the world in every aspects.
BIHAR is the second face of INDIA

Raju said...

Quite provoking write up.....carry on the flame dear

raju

Aashu said...

@Raju: Thanks sir! Its really great to see you appreciate my writings sir. Hope I don't let you down with my write up!!!